हज़ारों ख्वाईशें ऐसी के हर ख्वाईश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमां लेकिन फिर भी कम निकले,, ,,,,मिर्ज़ा ग़ालिब

 

 

 

 

 

 

जयपुर,,,बात  उर्दू अदब के उस महान शायर की जिनकी शायरी लफ्ज़ उनकी जिंदादिली आज भी जिंदा है आज 27 दिसंबर को मिर्ज़ा असद्दुल्लाह बैग खान उर्फ मिर्ज़ा ग़ालिब को याद करते हुए उनको खिराज ए अकीदत पेश करते हुए मदरसा जामिया मिल्लिया बंधा बस्ती नहारी का नाका में प्रोग्राम उनकी जिंदगी पर मूनक्किद हुआ जिसमे मदरसे के 2 तलबाओं हाफ़िज़ मुहम्मद सोहेल और मुहम्मद समीर ने उनकी जिंदगी पर रोशनी डाली और खूबसूरत अशार पेश किए साथ ही इस मौके पर राष्ट्रीय मुस्लिम महासभा अध्यक्ष सैय्यद साहिबे आलम साहब ने बताया मुल्क की आज़ादी और आपसी भाई चारे में यकीन रखने वाले मिर्ज़ा ग़ालिब साहब की पूरी जिंदगी सिर्फ अच्छे अखलाक मोहब्बत और अमन पे थी उनके लिखे अशआर आज भी उनकी यादों की तरह जिंदा है मदरसे के बच्चो की हौसला अफजाई करते हुए सैय्यद साहिबे आलम साहब ने उन्हें फल तकसीम किए उन्होंने कहा तालीम हासिल करने वाले ये बच्चे मुल्क का भविष्य हैं साथ ही मदरसे के संस्थापक कारी मोहम्मद इसहाक साहब को मुबारकबाद दी ऐसे हालातों में इतने कम संसाधन होते हुए आप बच्चो को दीन और दुनियावी तालीम दे रहें हैं  मदरसे और सफाई की तारीफ की गई

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