ग्रेटर नगर निगम को सरकार का झटका, संचालन समितियों के गठन का प्रस्ताव निरस्त

 

जयपुर,राज्य सरकार ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर को झटका दिया है। 28 जनवरी की साधारण सभा में गठित 28 में से 27 समितियों के गठन को नगरपालिका अधिनियम की धारा के विपरीत मानते हुए स्वायत्त शासन विभाग ने गुरुवार को निगम के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है। विभाग ने केवल कार्यकारी समिति के गठन को एक्ट के प्रावधानों के अनुकूल माना है विभाग की ओर से जारी आदेश में लिखा गया है कि सभी समितियों में 3-3 ऐसे लोगों को स्थाई सदस्य बनाए गए हैं, जो नगर निगम के सदस्य नहीं है। इनके चयन में निर्धारित नियमों की पालना नहीं की गई। साथ ही 7 अतिरिक्त समितियों के गठन के लिए सरकार से पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई। विभाग ने नियमानुसार मानते हुए कार्यकारिणी समिति के गठन को स्वीकृति दी है। विभाग ने आदेश में लिखा है कि कार्यकारिणी समिति सहित कुल 21 समितियां ही गठित की जा सकती थी, लेकिन निगम के बोर्ड ने 7 अतिरिक्त समितियों का गठन किया, इसलिए इन 27 समितियों के गठन का प्रस्ताव निरस्त किया गया है। विभाग ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 55 और 56 के प्रावधानों के आधार पर निरस्तीकरण का आदेश दिया है। गौरतलब है कि ग्रेटर नगर निगम की 28 जनवरी को हुई बोर्ड बैठक में 28 समितियों के प्रस्ताव को पारित कर राज्य सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया था। जिस पर सरकार ने प्रस्ताव को एक्ट के विपरित मानते हुए समितियों के गठन के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया है। इन समितियों में कुल 32 चेयरमैन बनाए गए थे।

बाहरी सदस्यों को इन परिस्थितियों में किया जा सकता है शामिल

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 56 में बाहरी व्यक्ति को शामिल करने के संबंध में प्रावधान किए गए हैं। इनके तहत बाहरी व्यक्ति को समिति का सदस्य बनाने के लिए नगरपालिका के कुल सदस्यों के कम से आधे सदस्य इस संबंध में संकल्प प्रस्तुत करें। ऐसा संकल्प समय—समय पर प्रस्तुत किया गया हो। जिस व्यक्ति को शामिल किया जा रहा है, वो विशेष अर्हताएं रखता हो। साथ ही ऐसा व्यक्ति नगरपालिका सदस्य के रूप में निर्वाचित होने की समस्त योग्यता रखता हो। विभाग ने माना है जिन लोगों को शामिल किया गया है, वो इस तरह की अर्हता या योग्यता रखते हैं या नहीं, प्रस्ताव में स्पष्ट नहीं है।

बाहरी व्यक्ति पहले रह चुके हैं सदस्य

समितियों में बाहरी व्यक्ति को सदस्य पहली बार नहीं बनाया गया है। इससे पहले भी समितियों में बाहरी व्यक्तियों को सदस्य बनाया जाता रहा है। जिस पार्टी का बोर्ड होता है, उसके कार्यकर्ताओं और नेताओं को समितियों में सदस्य बनाया जाता रहा है। ज्योति खण्डेलवाल के महापौर काल के समय भी कई बाहरी सदस्यों को समिति में शामिल किया गया था। जबकि उस समय बोर्ड भाजपा का था, लेकिन कांग्रेस की महापौर होने की वजह से कई समितियों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जगह दी गई थी।

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